।। बाबा उमद सिंह आरती ।।
जय उमदा देवा, बाबा जय उमदा देवा ।
भक्त जनों की विनती, सफल करो सेवा।।
निश दिन नौपत बाजे, घंटा गहराती।
भीड. आपर द्वारें, आवें नीत ज्योती ।।
अगर कपुर जलावें, घी के दीप धरें।
सायं सवेरे प्रतिदिन, आरती भक्त करें।।
हाथ जोड. कर विनती, सेवक मिल गावें।
भकित भावें से ध्यावें, वांछित फल पावें ।।
जो शुद्ध नर हृदय , से नाम तेरा गावें।
बाबा की कुप से, कुशल करें सेवा।।
गांव बुहाना मैड़ी धाम है तेरा।
गुलजी नंदन आवैं, गुण गावें तेरा।
बाबा उमदा की आरती, जो कोर्इ नर गावें।
पालीराम उस नर का, संकट कट जावें।।
राम नाम का ध्यान लगाकर, अनहद नाद सुना करते थें।
अलख निंरजन निराकार को, जीव चराचर में लखते थें।
सम दरसी सर्वज्ञ संत , सर्वत्र प्रभु को ही भजते थें।
ऐसे ज्ञानी ध्यानी बाबा उमद सिंह, गांव बुहाना में रहतें थें।।
जय उमदा देवा, बाबा जय उमदा देवा ।
भक्त जनों की विनती, सफल करो सेवा।।
निश दिन नौपत बाजे, घंटा गहराती।
भीड. आपर द्वारें, आवें नीत ज्योती ।।
अगर कपुर जलावें, घी के दीप धरें।
सायं सवेरे प्रतिदिन, आरती भक्त करें।।
हाथ जोड. कर विनती, सेवक मिल गावें।
भकित भावें से ध्यावें, वांछित फल पावें ।।
जो शुद्ध नर हृदय , से नाम तेरा गावें।
बाबा की कुप से, कुशल करें सेवा।।
गांव बुहाना मैड़ी धाम है तेरा।
गुलजी नंदन आवैं, गुण गावें तेरा।
बाबा उमदा की आरती, जो कोर्इ नर गावें।
पालीराम उस नर का, संकट कट जावें।।
राम नाम का ध्यान लगाकर, अनहद नाद सुना करते थें।
अलख निंरजन निराकार को, जीव चराचर में लखते थें।
सम दरसी सर्वज्ञ संत , सर्वत्र प्रभु को ही भजते थें।
ऐसे ज्ञानी ध्यानी बाबा उमद सिंह, गांव बुहाना में रहतें थें।।